Bluetooth – Everything You Should Know

आजकल किसी भी फ़ोन में Bluetooth नहीं हो ऐसा हो ही नहीं सकता ! अब आप सोच रहे होंगे की ऐसा क्यों तो आज हम बात करने वाले है Wireless Connectivity के King “Bluetooth” के बारे में |

ब्लूटूथ का नाम कैसे पड़ा (रोचक है), ये काम कैसे करता है, इसका भविष्य क्या है और ये कौन-कौन डिवाइस में काम करता है |

आपको ये जान के हैरानी हो सकता है 2012 में 3.5 अरब डिवाइस में Bluetooth तकनीक का इस्तेमाल किया गया था वही 2018 में ये संख्या बढ़ कर 10 अरब तक पहुँच गयी !

Read More Bluetooth Market update 2018 (PDF , 13.1 MB , 45 Pages)

Introduction

Bluetooth एक Radio Wave पर आधारित तकनीक है जिसके जरिये बहुत कम दुरी (10 m या 30 फीट) के अन्दर किसी भी डिजिटल डिवाइस को एक साथ जोड़ सकते है |

यह लोगो को इसलिए पसंद आया क्योंकी इससे कम पॉवर खपत में  Wireless Data Transfer होता है यानि की बिना किसी तार के मदद से आप एक डिवाइस से दुसरे डिवाइस में डाटा ट्रान्सफर कर सकते है |

Bluetooth name

इसका नाम Harald “Blåtand” Gormsson से लिया गया है जो Denmark और Norway के राजा थे, इस नाम का सुझाव Jim Kardach के द्वारा दिया गया था जिन्होंने एक तरकीब निकाले थे जिसके जरिये मोबाइल और कंप्यूटर  संवाद कर सके |

आइये अब जानते है की ये कैसे काम करता है ?

How Bluetooth Works ?

ब्लूटूथ PAN (Personal Area Network) या Piconet पर काम करता है जिसमे कम से कम 2 डिवाइस और ज्यादा से ज्यादा 8 डिवाइस तक एक साथ जोड़े जा सकते है |

master and slave in bluetooth

इसमें एक Master होता है जो Connection की शुरुआत करता है और इससे जुड़े डिवाइस को Slave कहा जाता है |

ब्लूटूथ ISM (Industrial Scientific Medical) Band पर काम करता है जो 2.45 Ghz पर केंद्रित 79 विभिन्न Frequency (चैनल) के बैंड में रेडियो तरंग भेजता है और प्राप्त करता है, ये रेडियो तरंग Radio,Television और फ़ोन के तरंगो से अलग होता है |

अब आप ये सोच रहे होंगे की अगर हम एक साथ ढेर सारे Bluetooth Device को एक साथ एक जगह पे कनेक्ट करते है तो डाटा ट्रान्सफर करने में दिक्कत क्यों नहीं होता है, तो यहाँ पर इस्तेमाल होता है Frequency-hopping spread spectrum 

Frequency-hopping spread spectrum रेडियो सिग्नल भेजने का एक तकनीक है जिसमे लगातार Frequency को बदला जाता है और ब्लूटूथ के कनेक्शन में एक सेकंड में 1600 बार Frequency बदला जाता है इसलिए किसी भी डिवाइस में डाटा ट्रान्सफर करने में दिक्कत नहीं होता है |

इसका उपयोग बहुत सारे इंडस्ट्री में भी किया जा रहा है क्योंकी ब्लूटूथ बहुत ही कम समय में बड़ा फाइल का पैकेट भेजता है जिसे Burst भी कहा जाता है और ब्लूटूथ की स्पीड भी Burst में आसानी से नापा जाता है जैसे 2Mbit/s Burst 

Evolution

1998 में Ericsson के द्वारा ब्लूटूथ  तकनीक का इजाद किया गया था परन्तु जब इसका पहला वरजन (Bluetooth 1.0 &1.0B) 1999 में लांच हुआ तो  उसमे बहुत ज्यादा खामियां मौजूद था पर धीरे-धीरे इसमें बहुत सुधार और विकास हुआ |

आइये संक्षेप में  सभी Bluetooth Version के बारे में जानते है :-

  • Version 1.1 – 1.0 B की तुलना में बहुत सुधार किया गया, जो गलती था उसे भी सुधार गया और IEEE मानक 802 (2002)  के रूप में प्रमाणित भी किया गया |
  • Version 1.2 – कनेक्शन को तेज किया गया और Frequency-hopping spread spectrum  तकनीक का इस्तेमाल किया गया |
  • Version 2.0 + EDR – इसमें पॉवर खपत को कम किया गया और कुछ मामूली अपग्रेड के साथ EDR (Enhanced Data Rate) लाया गया जिससे कनेक्शन और तेज हो गया |
  • Version 2.1 + EDR – इस वरजन में Pairing पर ध्यान दिया गया जिससे दो डिवाइस को एक साथ कनेक्ट करना आसान हो जाये |
  • Version 3.0 + HS – लिखित तौर पर ब्लूटूथ की डाटा ट्रान्सफर की स्पीड 24Mbit/s था और इसमें AMP (Alternative MAC/PHY) भी जोड़ा गया था | 
  • Version 4.0 + LE – इसमें बहुत ही कम पॉवर खपत होता था पिछले version के मुताबिक और Pairing करने में भी सुधार किया गया |
  • Version 4.1 – पिछले version के मुकाबले थोडा सा Software Upgrade किया गया  |
  • Version 4.2 – इसमें ब्लूटूथ को और ज्यादा सुरक्षित बनाया गया और Data Packet को भी बढाया गया |
  • Version 5 – ये आजकल के सभी स्मार्टफ़ोन में मिल जायेगा, इसमें कनेक्टिविटी को 4 गुना तक बढाया गया है और इससे 2 डिवाइस को एक साथ कनेक्ट कर सकते है जैसे एक ही स्मार्टफ़ोन से 2 ब्लूटूथ हैडफ़ोन को कनेक्ट कर सकते है  |

Bluetooth Specification

1998 में SIG (Special interest Group ) का गठन हुआ था जिसने 2004 में Core Specification पेश किया मतलब एक ब्लूटूथ डिवाइस में क्या होगा और कैसे काम करेगा |

Core Specification : इसके जरिये ये तय किया जाता है की Bluetooth प्रोडक्ट में  क्या-क्या जरुरी चीजें तथा योग्यता क्या होगा |

इसके तहत 5 Layer आता है :

  • Radio :  ट्रांसमिशन के लिए क्या-क्या जरुरत है जैसे Frequency,Modulation इत्यादि |
  • Baseband Layer : इसके माध्यम से Frequency Hopping और Data Packet के साइज़ का निर्धारण किया जाता है, Data Packet  68 bits से लेकर 3071 bits तक हो सकता है |
  • LMP (Link Manager Protocol) : जैसा की नाम से ही पता चलता है इसके द्वारा लिंक को सेटअप और मैनेज किया जाता है |
  • L2CAP (Logical Link Control and Adaptation Protocol ) : इसके द्वारा Upper Layer Protocol को Baseband Layer तक लाया जाता है |
  • (SDP) Service Discovery Protocol : इसके द्वारा दुसरे डिवाइस जो Connected है उसकी जानकारी हासिल की जाती है |

पहला तीन Layer Bluetooth Module बनाता है और आखरी के दो Layer Host बनाता है, इन दोनों के बिच के interface को Host Controller Interface कहा जाता है |

Profile Specification : ये अलग-अलग Bluetooth प्रोटोकॉल की विस्तृत जानकारी प्रदान करता है |

source : Elprocus

iS Bluetooth Secure ?

Wireless तकनीक हमेशा Wired के मुकाबले कम सुरक्षित रहा है ,ऐसा नहीं है की ब्लूटूथ Unsecure है परन्तु पुरी तरह Secure भी नहीं है !

  • Bluesnarfing : ये Personal Data जैसे  contact lists, emails और text messages चुराने का तरीका है जो ब्लूटूथ के जरिये किया जाता है |
  • Bluejacking : इस प्रक्रिया में दुसरे ब्लूटूथ डिवाइस में Message भेजा जाता है जैसे  “You’ve just been bluejacked!”
  • Bluebugging : ये Bluesnarfing के तरह ही है जिसमे हैकर आसानी से targeted फ़ोन के कॉल को सुन सकता है और कॉल फॉरवर्ड भी कर सकता है |

ये कुछ तरीके थे जिससे लगता है की ब्लूटूथ सिक्योर या सुरक्षित नहीं है परन्तु बढ़ते तकनीक के साथ ये सभी Security में सुधार किया गया है और आपको चिंता करने की जरुरत नहीं है !

Bluetooth vs Wi-Fi

कुछ लोग ब्लूटूथ और Wi-Fi में कंफ्यूज हो जाते है क्योंकी दोनों एक ही तरह से काम करता है ये सिर्फ देखने में लगता है परन्तु ब्लूटूथ बहुत ही कम दुरी और बहुत ही कम डाटाके लिए काम करता है जैसे 10 metre

वही दूसरी ओर Wi-Fi लम्बी दुरी के साथ-साथ बड़ा फाइल भेजने में काम आता है पर इसमें पॉवर खपत ज्यादा होता है ब्लूटूथ के मुकाबले |

आप अपने जरुरत के हिसाब से दोनों तकनीक का इस्तेमाल कर सकते है और ये दोनों आपस में दुश्मन नहीं है बल्कि दोनों कमाल की तकनीक है |

Application

bluetooth-smart-home
Smart Home

Bluetooth का उपयोग हर Digital Device में होने लगा है जैसे :

  • Smartphone
  • Camera
  • Laptop
  • Speaker
  • Smartband,Smartwatch
  • Mouse,Keyboard
  • Printer
  • Webcam इत्यादि 

आने वाले समय में IoT (Internet Of Things) में Bluetooth का अहम् योगदान रहेगा |

Conclusion

उम्मीद है की आपको Bluetooth के बारे में जानकारी मिला होगा और हाँ अभी भी कोई सवाल हो तो कमेंट जरुर करे |

आने वाले समय में ब्लूटूथ Internet Of Things की रीढ़ की हड्डी साबित होगा ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है क्योंकी ये कम दुरी में डाटा ट्रान्सफर करने में माहिर है जो Smart Home में बहुत काम आयेगा |

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